અગ્નિહોત્ર યજ્ઞથી કુશવાહા પરિવારનો બચાવ – ભોપાલ ગૅસ કૌભાંડ [अग्निहोत्र यज्ञ से कुशवाहा परिवार का बचना – भोपाल गैस काण्ड]

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અગ્નિહોત્ર યજ્ઞથી કુશવાહા પરિવારનો બચાવ

[अग्निहोत्र यज्ञ से कुशवाहा परिवार का बचना]

 

આ ગેસ કૌભાંડમાં કુશવાહા કુટુંબને નુકસાન નહી થયું, કારણ કે તે કુટુંબમાં દરરોજ અગ્નિહોત્ર થતો હતો અને તે દિવસે પણ ત્યાં થયો હતો, અગ્નિહોત્ર એક પ્રકારનું યજ્ઞ છે.  જે અાદીકાલથી ભારતીય સંસ્કૃતિનું ભાગ છે. યજ્ઞની વાર્ણામાં પ્રદૂષણના ઉકેલ માટે વૈજ્ઞાનિક સાધન ગણવામાં આવે છે. [इस गैस काण्ड में भोपाल का कुशवाहा परिवार बिना किसी हानि के बच गया।  क्योंकि उस परिवार में प्रतिदिन अग्रिहोत्र किया जाता था और उस दिन भी किया जा रहा था।  अग्निहोत्र एक प्रकार का यज्ञ होता है, जो आदिकाल से भारतीय संस्कृति का अंग रहा है। यज्ञ को वातरण में प्रदूषण के समाधान के लिये वैज्ञानिक उपकरण माना जाता है।]

 


 

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एक वैदिक यज्ञ के चमत्कारी प्रभाव से बची थीं लाखों जिंदगियां

1. जहरीली गैस का आकस्मिक रिसाव

2-3 दिसंबर, 1984 के दौरान मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित कंपनी यूनियन कार्बाइड में एक बड़ी दुर्घटना घटी और मिथाइल आइसोसाइनाइड के रिसाव की वजह से लाखों जिंदगियां खतरे में पड़ गईं। जहरीली और दम घोंटने वाली इस गैस का फैलाव पूरे राजधानी परिक्षेत्र में होने के कारण लोगों के पास भागने का भी रास्ता नहीं बचा और देखते-देखते हजारों लोगों ने अपने प्राण गंवा दिए।

2. विकलांगता

जिस रात यह तबाही फैल रही थी उस रात अचानक भोपाल के रहने वाले एस.एल. कुशवाहा, जो पेशे से अध्यापक थे, अपनी पत्नी की तबियत खराब होने की वजह से नींद से जाग गए।

3. काबू से बाहर थी स्थिति

कुछ देर बाद उनके बच्चों की हालत भी खराब होने लगी और बाहर से भी शोर की आवाजें आने लगीं। तब उन्हें समझ आया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से गैस लीक होने लगी है।

4. अग्निहोत्र यज्ञ का संचालन

उनके आसपास के लोग अपना घर छोड़कर भाग रहे थे और उन्हें भी यही सुझाव दिया गया। लेकिन इसी बीच उनकी पत्नी ने उनसे कहा कि “भागने से बेहतर हम अग्निहोत्र यज्ञ क्यों नहीं संचालित करते?

5. चमत्कार था यह

कुशवाहा यज्ञ संचालित करने के लिए राजी हो गए और यज्ञ शुरू करने के मात्र 20 मिनट के अंदर ही उस घातक गैस का असर उनके शरीर से कम होता गया।

6. मौत का इंतजार

अपने चार बच्चों के साथ एम.एल. राठौड़ भोपाल स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे थे और उनके सामने कई लोग अपना दम तोड़ चुके थे।

7. वातावरण की स्वच्छता

करीब पांच वर्ष पहले राठौड़ ने अग्निहोत्र यज्ञ करने की शुरुआत की थी और समय की मांग की वजह से स्टेशन पर बैठे हुए ही यज्ञ को अंजाम देना शुरू कर दिया। इसके बाद हजारों अग्निहोत्रियों ने लोगों और वातावरण को इस भयंकर गैस त्रासदी से बचाने के लिए इस यज्ञ का संचालन शुरू कर दिया।

8. प्रजापति परिवार

प्रजापति परिवार के साथ तो जैसे चमत्कार ही हो गया। भोपाल गैस त्रासदी के दौरान इनका पूरा परिवार प्रभावित हुआ। ओ. एन. प्रजापति की पत्नी मरने की हालत तक पहुंच गई थीं, स्वयं प्रजापति और उनके बच्चे गैस के प्रभाव को झेल नहीं पा रहे थे।

9. हैरान करने वाली घटना

ऐसे में उन्होंने अग्निहोत्र यज्ञ की शुरुआत की और लगभग एक सप्ताह बाद वे और उनके पुत्र ठीक हो गए, हालांकि उनकी पत्नी को ठीक होने में एक माह लगा लेकिन उनके साथ एक अजीब सा चमत्कार हुआ।

10. बेहतर स्वास्थ्य

जहां भोपाल त्रासदी से पीड़ित लोगों की आने वाली पीढ़ी को भी इस गैस का दंश झेलना पड़ा था वहीं करीब एक वर्ष बाद प्रजापति के घर बेटी ने जन्म लिया, जिसका स्वास्थ्य उनके अन्य दोनों बच्चों से बेहतर था।

11. दवाई के तौर पर प्रयोग

हर प्रभावित स्थान पर 8-10 लोगों के समूह ने 40-50 जगहों पर लगातार अग्निहोत्र यज्ञ किया और इस यज्ञ की राख लोगों को दवा के तौर पर दी।

12. अग्निहोत्र यज्ञ की राख

प्रतिदिन सुबह-शाम अग्निहोत्र यज्ञ किया जाता और इसकी राख से बनाई जाने वाली दवाई पीड़ित लोगों की आंखों में डाली जाती।

13. बैरी रैथर

फरवरी 1985 में अमेरिका के रहने वाले बैरी रैथर भोपाल के लोगों की मदद करने के उद्देश्य से भारत आए और अग्निहोत्र यज्ञ के प्रभाव से इस कदर प्रभावित हुए कि स्वयं इस यज्ञ को करने के लिए तैयार हो गए।

14. रेडियोएक्टिव किरणें

वैज्ञानिकों ने इस मसले की जांच शुरू की कि कैसे मात्र एक यज्ञ करने से ही वातावरण में मौजूद रेडियोएक्टिव किरणें अपना प्रभाव खो बैठती हैं। पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों को लगता था कि जरूर यज्ञ में बेहद प्रभावी केमिकल का प्रयोग किया जाता है।

15. केमिकल प्रॉसेस

लेकिन फिर उन्होंने सोचा अगर यह सिर्फ एक केमिकल प्रॉसेस है तो किसी भी रूप में परमाणु के नाभिक को बदलना मुश्किल है इसलिए यह केमिकल का कमाल तो नहीं हो सकता।

16. कोल्ड फ्यूजन

पिछले कुछ सालों में कई लेख प्रकाशित हुए जो पूरी तरह ‘कोल्ड फ्यूजन’ अर्थात लैब के अंदर सामान्य हालातों में अणुओं को फ्यूज करने पर आधारित थे। तब जाकर वैज्ञानिकों को यह यकीन हुआ कि हां, वाकई अणुओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

17. खत्म हो जाता है दुष्प्रभाव

इस प्रक्रिया के दौरान अणु मिलकर एक नए तत्व का सृजन करते हैं और अंततः उनका दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है।

18. हवन

अग्निहोत्र यज्ञ भी इसी विधा का एक रूप है, जिसके अंतर्गत अग्निहोत्र यज्ञ को संचालित करने वाले व्यक्ति के मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगें हवन की ज्वाला को प्रभावित करती हैं।

19. वर्तमान समय और यज्ञ

हालांकि वर्तमान समय के मद्देनजर यह कहा जाता है कि 4-5 या इससे अधिक लोग समूह बनाकर वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए इस यज्ञ को अंजाम दे सकते हैं लेकिन उनका तरीका वैदिक नहीं होता। इस हवन को मात्र 15 मिनट में संपन्न कर लिया जाता है।

20. नंबूदरी ब्राह्मण

परंतु आज से करीब हजारों साल पहले केरल के नंबूदरी ब्राह्मण इस यज्ञ को करते थे और आज भी वे पूरी वैदिक रीति से अग्निहोत्र यज्ञ करते हैं।

21. कैसे होता है यज्ञ

अग्निहोत्र यज्ञ का मुख्य भाग है जौ। इस यज्ञ को सूरज ढलते और सूरज के उगते ही प्रारंभ किया जाता है और दोनों ही समय अग्नि को जौ अर्पित करने होते हैं। इस यज्ञ से बनाई गई विभूति इंसान और वातावरण, दोनों को ही रोग मुक्त बनाती है।

22. अथर्ववेद में जिक्र

अग्निहोत्र यज्ञ का जिक्र अथर्ववेद में किया गया है और यजुर्वेद में इससे जुड़ा हर विवरण उल्लिखित किया गया है।

 


સરળ માર્ગ અગ્નિહોત્ર યજ્ઞ

 


The Bhopal Gas Tragedy and Agnihotra

Indian Vedic contribution is a reservoir of Vibrant Information and Harmonious Creativity. May the womb of nature embrace all with tranquil blessings from this day forward. Let this attract one’s attention affecting them positively. It is a Sanctuary of the Self a Creative Venue which serves as an Enduring Expression of Lightness, where a peaceful Atmosphere with Sunlight Flows and serene atmosphere prevail.

In the storm of life we struggle through myriads of stimuli of pressure, stress, and muti-problems that seek for a solution and answer. We are so suppressed by the routine of this every life style that most of us seem helpless. However, if we look closely to ancient techniques we shall discover the magnificent way to understand and realize the ones around us and mostly ourselves. If only we could stop for a moment and allow this to happen. May all beings be happy (Loka Samastha Sukhino Bhavanthu)

The tragic incident occurred on the night of December 3, 1984 when the poisonous MIC gas leaked from Union Carbide factory at Bhopal. Hundreds of people died and thousands were hospitalized but there were two families – those of Shri Sohan Lal S Khushwaha and Shri M.L. Rathore, living about one mile away from the plant who came out unscathed. These families were regularly performing agnihotra (havan). In these families nobody died, nobody was even hospitalized despite being present in the area worst affected by the leakage of the toxic gas. This observation implies that agnihotra is a proven antidote to pollution.  

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हवन का महत्व​

👉 फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः

आम की लकड़ी पर किया जाता है। 

जब आम की लकड़ी जलती है तो 

फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।

जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।

तथा वातावरण को शुद्द करती है। 

इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।

गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।

टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की 

यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो*

तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं

और 

शरीर शुद्ध हो जाता है।

हवन की महत्ता देखते हुए 

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च की ।

क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है

और 

जीवाणु नाश होता है ?

अथवा नही ? 

उन्होंने ग्रंथों में वर्णिंत *हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया …  कि ये विषाणु नाश करती है। ✔

 फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा कि 

सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए । 

पर

जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी  …  तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया।

यही नहीं उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था।

बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस *एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।

यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। 

रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा 

न सिर्फ मनुष्य 

बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। 

जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है ।

अगर चाहें तो अपने परिजनों को इस जानकारी से अवगत कराए ।

 हवन करने से न सिर्फ भगवान ही खुश होते हैं बल्कि घर की शुद्धि भी हो जाती है ।

भगवान सभी परिजनों को सुरक्षा एवं समृद्धि प्रदान करें ।