મૂળભૂત આરોગ્ય[Basic Health]

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મૂળભૂત દેશી આયુર્વેદિક (Basic Desi Ayurvedic)


સારું આરોગ્ય જાળવવા શું કરવું?

ખાંડના ડખા બંધ કરીને દેશી ગોળ

આયોડીન નમક બંધ કરીને સિંધવ મીઠું

મેંદો બંધ કરીને જવ,બાજરી,મકાઈ

રિફાઈન્ડ તેલ બંધ કરીને ઘાણીનું તેલ

ભેંસનું દૂધ બંધ કરીને દેશી ગાયનું દૂધ

ફ્રીઝનું પાણી બંધ કરીને માટલાનું પાણી

ટીવી બંધ કરીને રેડિયો(જુના ગીત કે ભજન કે સંગીત

વિલાયતી દવા બંધ કરીને દેશી દવા કે આયુર્વેદ

ઘરની અંદર ભરાઈ રહેવા કરતાં કુદરતના ખોળે રહો

હોટલનું ખાવાનું બંધ કરીને ઘરનું સાત્વિક ભોજન

રાત્રે વહેલા સુઈ ને સવારે વહેલા ઉઠો

ઠંડાપીણાં પીવાનું બંધ કરો લીંબુ શરબત કે ઓરીજીનલ ફળોના રસ

આ બાર નિયમોનું પાલન કરશો તો કોઈપણ રોગ આપની પાસે આવતાં સો વાર વિચાર કરશે

  – ડો રાજીવભાઈ દીક્ષિત


  1. તુલસી, तुलसी, Tulshi

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    તુલસી ને કદી વુક્ષ ના સમજવું જોઈએ, ગાય ને કદી પશું ના સમજવું, અને માતા પિતાને કદી મનુષ્ય ના સમજવા, કેમ કે એ ત્રણે સાક્ષાત ભગવાન નું રુપ છે.


2. અદુસા, अडूसा, Adusa
 
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3. સાગરગોટી, सागरगोटी, Sagargota (કાચકો, Kachko) (Nickernut, નિકેરન્ટ)
 
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4. એલચો, पत्थरचट्टा, Bryophyllum pinnatum
 
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ઉપયોગ (Use)

1. પથરી, पथरी , Stone

चाहे शरीर के किसी भी अंग में पथरी क्यों ना हो, ये 15 बुँदे उसको जड़ से हमेशा के लिए ख़त्म कर परेशन से निजात दिलाएगी,

दोस्तों पथरी आजकल की आम समस्या हो गयी हैं जिसका इलाज भी हमारे घर आंगन में ही हैं लेकिन हमारी मानसिकता हो गयी हैं डोक्टर के पास भागने की । ये पोधा हैं पथर चट्टा (Bryophyllum pinnatum) का जिसे पाखाण भेद भी कहते हैं जिसका अर्थ हैं पथर को तोड़ने वाला । इसके 3 पतो को सुबह व् शाम को खाली पेट 20 से 25 दिन सेवन करने से पत्थरी टूट कर निकल जाती हैं । आयुर्वेद अपनाये स्वास्थ्य बचाए।

 5. शेर-कांडवेल, Euphorbia tirucalli
 
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6. પુદિના, पुदीना, Pudina
 
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7. કુંવારપાઠું, एलोवेरा, ALOE VERA
 

 एलोवेरा  एक औषधीय पौधा है और यह भारत में प्राचीनकाल से ग्वारपाठा या धृतकुमारी नाम से जाना जाता है। यह कांटेदार पत्तियों वाला पौधा है जिसमें रोग निवारण के गुण भरे हैं। औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। इसे साइलेंट हीलर तथा चमत्कारी औषधि भी कहा जाता है।एलोवेरा के जूस का सेवन करने से शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है. एलोवेरा में एक जड़ी-बूटी की तरह कई गुण होते हैं. चेहरे के लिए अमृत और औषधीय गुणों का भण्डार है एलोवेरा।।

इसकी 200 से ज्यादा प्रजातियां हैं लेकिन इनमें से 5 प्रजातियां हीं हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। रामायण, बाइबिल और वेदों में भी इस पौधे के गुणों की चर्चा की गई है। एलोवेरा का जूस पीने से कई वीमारियों का निदान हो जाता है। आयुर्वेदिक पद्धति के मुताबिक इसके सेवन से वायुजनित रोग, पेट के रोग, जोडों के दर्द, अल्सर, अम्लपित्त आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं। इसके अलावा एलोवेरा को रक्त शोधक, पाचन क्रिया के लिए काफी गुणकारी माना जाता है। सबसे अच्छी बात तो यह की एलोवेरा जूस का असर सिर्फ 15-20 दिनों में दिखने लगता हैं

1. एनर्जी बढ़ाए : नियमित रूप से एलोवेरा जूस को पीने से एनर्जी आती है। एलोवेरा जूस में कई तरह के पोषण तत्व, विटामिन और मिनरल होते है जो बॉडी सिस्टम को सुधार होता है और उसे एनर्जी देते है। इसे पीने से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता भी बढ़ जाती है। एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।

2. बालों और त्वचा की सुंदरता बढ़ाये : एलोवेरा जूस के सेवन से त्वचा में निखार आने लगता है। इसके नियमित सेवन से आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां और चमकदार लगती है। एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा जूस बालों के लिए भी फायदेमंद है। इसको पीने से बालों में चमक आती है, रूसी दूर हो जाती है और टेक्सचर भी अच्छा हो जाता है। एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्य होते हैं।

3. अच्छा पाचक : एलोवेरा जूस में प्रचुर मात्रा में पाचक तत्व विद्यमान होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह पेट के रोगो में बहुत फायदा करता है। एलोवेरा जूस के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है।

4. डिटॉक्स जूस : हमारे शरीर में मौजूद कई तरह के विषैले तत्व त्वचा को खराब और बॉडी सिस्टम पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इसलिए बॉडी को डिटॉक्स करने की जरूरत होती है। एलोवेरा जूस एक अच्छा डिटॉक्सीफिकेशन करने वाला पेय है।

5. वजन कम करें : नियमित रूप से एलोवेरा जूस पीने से बढ़ा हुआ वजन कम होने लगता है। और इसे पीने से बार-बार खाने की आदत भी दूर हो जाती है और आपकी पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है। एलोवेरा जूस में कई पोषक तत्व होते है जो शरीर का कमजोर नहीं होने देते है।

6. दांतों के लिए लाभकारी : एलोवेरा जूस दांतों के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोवाइल गुण दांतों को साफ और कीटाणु मुक्त रखने में मदद करते है। एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को भी रोका जा सकता है।

7. आइये अब संक्षेप में जानते है ?एलोवेरा के गुणों के बारे में

• नजले-खांसी में एलोवेरा का रस दवा का काम करता है. इसके पत्ते को भूनकर रस निकाल लें और आधा चम्मच जूस एक कप गर्म पानी के साथ लेने से नजले-खांसी में फायदा होता है।
• जलने या चोट लगने पर एलोवेरा जेल या एलोवेरा को छिलकर लगाने से आराम मिलता है. जली हुई जगह पर एलोवेरा जेल लगाने से छाले भी नहीं निकलते और तीन-चार बार लगाने से जलन भी खत्म हो जाती है।
• एलोवेरा का रस बालों में लगाने से बाल काले, घने और मुलायम रहते हैं।
• एलोवेरा का रस बवासीर, डायबिटीज और पेट की परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करता है।
• एलोवेरा से मुहांसे, रूखी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों और आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
• एलोवेरा गंजेपन को भी दूर करने की ताकत रखता है।
• एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी दूर होती है।
• एलोवेरा के जूस से शरीर में खून की कमी को दूर किया जा सकता है।
• फटी एड़ियों पर एलोवेरा लगाने से बहुत जल्दी ठीक हो जाती हैं।
• एलोवेरा का जूस ब्लड में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
• एलोवेरा का रस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार और स्वस्थ होते हैं।
• सरसों के तेल में एलोवेरा के रस को मिलाकर सिर धोनें से पहले लगाने से बालों में चमक आती है।
• एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखाई देती है।
• एलोवेरा को सरसों के तेल में गर्म करके लगाने से जोड़ों के दर्द को कम किया जा सकता है।
• तेज धूप में निकलने से पहले एलोवेरा का रस अच्छी तरह त्वचा पर लगाने से त्वचा पर सनबर्न का कम असर पड़ता है।
• एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन में भी इस्तेमाल किया जाता है।
• एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।

8. એલોવેરા જ્યુસ
 
 
રીત
 
એલોવેરાના તાજા પાન લો અને તેને સારી રીતે ધોઇ લો. હવે ચપ્પાની મદદથી તેની કિનારીના કાંટાળા ભાગને કાઢી લો. પાનના ટુકડા કરો અને સાથે તેની પરનો લીલો ભાગ અલગ કરો. આ સમયે ધ્યાન રાખો કે પાનની ઉપરનો પીળો ભાગ પણ નીકળી જાય. જો તે રહી જશે તો જ્યૂસ કડવો બનશે. તેને બે મિનિટ સુધી મિક્સરમાં ક્રશ કરો. એક ગ્લાસમાં કાઢો અને પાણી અને મીઠું મિક્સ કરો, જો તમે ઇચ્છો તો તેમાં ફ્રૂટ જ્યૂસને પણ મિક્સ કરી શકો છો.

8.  Curry Leaves/ Kadi Patta
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9.  Lemon Grass
 
 
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10. CAROM/ AJWAIN

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11. कच्चा केला

 

पके हुए केले के ढ़ेरो फायदों के बारे में आपको पता होगा और हो सकता है कि आप नियम से एक केला खाते भी हो. या फिर बनाना शेक पीते हों या स्मूदी. पका हुआ केला जहां चाव से खाया जाता है वहीं कच्चे केले का इस्तेमाल सिर्फ सब्जी और कोफ्ता बनाने में ही किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि आमतौर पर लोगों को इसके फायदों के बारे में पता ही नहीं होता.
कच्चा केला पोटैशियम का खजाना होता है जो इम्यून सिस्टम को तो मजबूत बनाता है ही साथ ही ये शरीर को दिनभर एक्टि‍व भी बनाए रखता है. इसमें मौजूद विटामिन बी6, विटामिन सी कोशिकाओं को पोषण देने का काम करता है. कच्चे केले में सेहतमंद स्टार्च होता है और साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी. ऐसे में नियमित रूप से एक कच्चा केला खाना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. 

कच्चा केला खाने के फायदें:
1. वजन घटाने में मददगार 
वजन घटाने की कोशि‍श करने वालों को हर रोज एक केला खाने की सलाह दी जाती है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं जो अनावश्यक फैट सेल्स और अशुद्धियों को साफ करने में मददगार होते हैं.
2. कब्ज की समस्या में राहत 
कच्चे केले में फाइबर और हेल्दी स्टार्च होते हैं. जोकि आंतों में किसी भी तरह की अशुद्ध‍ि को जमने नहीं देते. ऐसे में अगर आपको अक्सर कब्ज की समस्या रहती है तो कच्चा केला खाना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा.
3. भूख को शांत करने में 
कच्चे केले में मौजूद फाइबर्स और दूसरे कई पोषक तत्व भूख को नियंत्रित करने का काम करते हैं. कच्चा केला खाने से समय-समय पर भूख नहीं लगती है और हम जंक फूड और दूसरी अनहेल्दी चीजें खाने से बच जाते हैं.
4. मधुमेह को कंट्रोल करने में मददगार 
अगर आपको मधुमेह की शिकायत है और ये अपने शुरुआती रूप में है तो अभी से कच्चा केला खाना शुरू कर दें. ये डायबिटीज कंट्रोल करने की अचूक औषधि है.
5. पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मददगार

कच्चे केले के नियमित सेवन से पाचन क्रिया बेहतर होती है. कच्चा केला खाने से पाचक रसों का स्त्रावण बेहतर तरीके से होता है.


 
12. સરગવાની શિંગ , सहजन , Drumsticks
 
 
दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पुरक आहार है सहजन (मुनगा) 300 से अधि्क रोगो मे बहोत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फल्ली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है
*आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है
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*सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना
1-विटामिन सी- संतरे से सात गुना
2-विटामिन ए- गाजर से चार गुना
3-कैलशियम- दूध से चार गुना
4-पोटेशियम- केले से तीन गुना
5-प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना
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*स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम,
विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है
*इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘ मोरिगा ओलिफेरा ‘ है हिंदी में इसे सहजना , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं.
*जो लोग इसके बारे में जानते हैं , वे इसका सेवन जरूर करते हैं
*सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है.
* ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है
*इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं
*इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया , साइटिका , पक्षाघात , वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है.
*मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है |
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*सहजन की सब्जी के फायदे.

सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है,
*इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है
*सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है
*ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है
*इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है
*इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है
*इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
*इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं
*पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
*इसके बीज को चूर्ण के रूप में
पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
*काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे
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कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |
* सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग , जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है
*शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
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सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है
*सर्दी-जुखाम
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यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।
*हड्डियां होती हैं मजबूत.
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सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है , जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके अलावा इसमें आइरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है
*इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है , इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में
आसानी होती है।
*सहजन में विटामिन-ए होता है , जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिए प्रयोग किया आता जा रहा है
*इसकी हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है
*यदि आप चाहें तो सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं इससे शरीर का खून साफ होता है |

कुछ अन्य उपयोग –

1) . सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया आदि में उपयोगी है।
2) सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका ,गठिया,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।
3) . सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है
4) . सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है\ साईं टिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है
5) सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।6) सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।
7) सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व् वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।
8) सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।
9) .सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।
10) . सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
11) . सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।
12) सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।
13) सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।
14) . सहजन. की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।
15) . सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।
16) सहजन. की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
17) . सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।
18) सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है .
19) सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।
20) . सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। ईससे जकड़न कम होगी।
21) . सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है।
22) .सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
23) सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।
24) सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।
25) . सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं।

26) . सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।


13. આકડા, मदार